सतना और मैहर के शहरी क्षेत्रों में खराब हवा और पानी के कारण टीबी के मामलों में तेजी आई है। 2026 के शुरुआती तीन महीनों में 938 केस सामने आए, जबकि कुल मरीजों का आंकड़ा 2000 पार पहुंचा।
सितपुरा क्षेत्र में रिलायंस बायो फ्यूल संयंत्र की जहरीली दुर्गंध से सांस लेना मुश्किल, ग्रामीणों का आंदोलन का अल्टीमेटम।
सतना में बदलते मौसम के साथ वायरल अटैक ने चिंता बढ़ा दी है। दिवाली अवकाश के बाद खुले जिला अस्पताल में एक ही दिन में 1640 मरीजों ने ओपीडी में इलाज कराया, जिनमें से 140 को भर्ती की सलाह दी गई। डॉक्टरों के अनुसार मरीजों में बुखार, खांसी, श्वसन समस्या, बॉडी पेन और कमजोरी जैसे लक्षण बढ़े हैं। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।
सीधी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है। डॉक्टरों के 60% और स्वास्थ्यकर्मियों के 30% पद खाली हैं। नियमित डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में नदारद रहकर प्राइवेट प्रैक्टिस में लगे हैं, जबकि संविदा डॉक्टरों के भरोसे मरीजों की जान बच रही है।
रीवा के 150 करोड़ के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एक्स-रे विभाग की दीवार और पिलर में दरार आ गई है। पहले से ही सीवेज, सीपेज और फॉल सीलिंग गिरने जैसी खामियों से घिरे इस अस्पताल की गुणवत्ता पर फिर सवाल उठे हैं। पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से मरीजों की जान पर संकट।
रीवा जिले के मऊगंज में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली सामने आई, जब एम्बुलेंस न मिलने पर परिजनों ने 75 वर्षीय मरीज को ठेले में लादकर अस्पताल पहुंचाया। घटना ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की लापरवाही उजागर कर दी है।
रीवा के संजय गांधी अस्पताल सहित विंध्य क्षेत्र के प्रमुख अस्पतालों में पीएसए यूनिट वर्षों से बंद पड़ी है। मरीजों को केवल लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) से सप्लाई दी जा रही है, जिस पर हर माह लगभग 20 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। जबकि पीएसए प्लांट चालू होने पर खर्च पांच लाख से भी कम आता।
सतना जिले के कोठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ऑक्सीजन सिलेंडर से गैस लीकेज और तेज आवाज के बाद अफरा-तफरी मच गई। हालांकि सिलेंडर नहीं फटा, लेकिन मरीजों और परिजनों में हड़कंप मच गया। अस्पताल की स्थिति पहले से ही बदहाल है, एक्स-रे मशीन 2 साल से बंद पड़ी है और बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है।
सतना जिले के स्वास्थ्य विभाग में हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य आयुक्त का नया आदेश अधिकारियों में खलबली मचा रहा है। जिले के केवल तीन डॉक्टरों को ही स्वतंत्रता दिवस पर सम्मान मिला। वहीं 108 एम्बुलेंस सेवा "खटारा एक्सप्रेस" में तब्दील हो चुकी है और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रशासन मौन है।
सिंगरौली जिले में क्रेशर संचालक शासन की गाइडलाइन को नजरअंदाज कर मनमानी से खदानें संचालित कर रहे हैं। धूल और डस्ट से ग्रामीण बीमार हो रहे हैं, दमा और सांस की बीमारियां बढ़ रही हैं। क्रेशर संचालन के लिए जरूरी बाउंड्रीवाल, वृक्षारोपण और पानी का छिड़काव तक नहीं किया जा रहा। जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे बैठे हैं।






















