रीवा के संजय गांधी अस्पताल में यूपीएस बैटरियां एक्सपायर होने से वेंटिलेटर बैकअप खतरे में है। प्रबंधन की लापरवाही से गंभीर वार्डों में मरीजों की जान जोखिम में है और बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
सिंगरौली जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी और अनुपस्थिति से मरीज परेशान, आरोप है कि सरकारी डॉक्टर निजी क्लीनिकों में व्यस्त, इलाज न मिलने से नाराजगी बढ़ी, स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे
रीवा के अस्पतालों में एक्सरे फिल्म की कमी से मरीजों को मोबाइल पर रिपोर्ट दी जा रही है। फीस पूरी ली जा रही, लेकिन सुविधाएं अधूरी हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सतना और मैहर के शहरी क्षेत्रों में खराब हवा और पानी के कारण टीबी के मामलों में तेजी आई है। 2026 के शुरुआती तीन महीनों में 938 केस सामने आए, जबकि कुल मरीजों का आंकड़ा 2000 पार पहुंचा।
सितपुरा क्षेत्र में रिलायंस बायो फ्यूल संयंत्र की जहरीली दुर्गंध से सांस लेना मुश्किल, ग्रामीणों का आंदोलन का अल्टीमेटम।
सतना में बदलते मौसम के साथ वायरल अटैक ने चिंता बढ़ा दी है। दिवाली अवकाश के बाद खुले जिला अस्पताल में एक ही दिन में 1640 मरीजों ने ओपीडी में इलाज कराया, जिनमें से 140 को भर्ती की सलाह दी गई। डॉक्टरों के अनुसार मरीजों में बुखार, खांसी, श्वसन समस्या, बॉडी पेन और कमजोरी जैसे लक्षण बढ़े हैं। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की अपील की गई है।
सीधी जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है। डॉक्टरों के 60% और स्वास्थ्यकर्मियों के 30% पद खाली हैं। नियमित डॉक्टर सरकारी अस्पतालों में नदारद रहकर प्राइवेट प्रैक्टिस में लगे हैं, जबकि संविदा डॉक्टरों के भरोसे मरीजों की जान बच रही है।
रीवा के 150 करोड़ के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एक्स-रे विभाग की दीवार और पिलर में दरार आ गई है। पहले से ही सीवेज, सीपेज और फॉल सीलिंग गिरने जैसी खामियों से घिरे इस अस्पताल की गुणवत्ता पर फिर सवाल उठे हैं। पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से मरीजों की जान पर संकट।
रीवा जिले के मऊगंज में स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली सामने आई, जब एम्बुलेंस न मिलने पर परिजनों ने 75 वर्षीय मरीज को ठेले में लादकर अस्पताल पहुंचाया। घटना ने स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की लापरवाही उजागर कर दी है।
रीवा के संजय गांधी अस्पताल सहित विंध्य क्षेत्र के प्रमुख अस्पतालों में पीएसए यूनिट वर्षों से बंद पड़ी है। मरीजों को केवल लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) से सप्लाई दी जा रही है, जिस पर हर माह लगभग 20 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं। जबकि पीएसए प्लांट चालू होने पर खर्च पांच लाख से भी कम आता।






















